श्रीलंका ने गौहत्या पर पूरी तरह बैन लगाया, श्रीलंकाई बौद्धों की मांग पर बैन, गौ को माता का दर्जा

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जो काम वर्तमान में भारत के हिन्दू नहीं करवा सके वो काम श्रीलंका के बौद्धों ने अपनी सरकार से करवा दिया, लोकतांत्रिक देश में सरकार वही काम करती है जो जनता चाहती है श्रीलंका के बौद्ध संगठनो की मांग पर श्रीलंका की सरकार ने पुरे देश में गौहत्या पर बैन लगा दिया है, ये बैन श्रीलंकाई हिन्दुओ की नहीं बल्कि श्रीलंकाई बौद्धों की मांग पर लगाया गया हैश्रीलंका के बौद्ध संगठनो ने प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षा से मांग करी थी की मुसलमान श्रीलंका में गौहत्या करते है और जैसे जैसे उनकी आबादी बढ़ रही है वैसे वैसे गौहत्या भी बढ़ रही है बौद्ध संगठनो ने सरकार से कहा की – बौद्ध धर्म में गौ पवित्र है और वो हमारी संस्कृति का हिस्सा है और हिन्दू धर्म के लोग भी गौ को माँ का दर्जा देते है ऐसे में श्रीलंका की धरती पर गौहत्या पर बैन लगे 



सरकार ने बौद्ध संगठनो की मांग को स्वीकार कर लिया और कैबिनेट ने गौहत्या पर पूरी तरह बैन लगा दिया 

बता दें की श्रीलंका भी भारत का ही कभी अंग रहा है, बौद्ध धर्म भी भारत में ही जन्मा है, और गौ का भारत, श्रीलंका और बौद्ध संस्कृति में अहम् हिस्सा है 
श्रीलंका में बौद्धों की जनसँख्या 70% के ही करीब है और उन्होंने गौहत्या पर बैन लगवा दिया, जबकि भारत में हिन्दुओ की आबादी 70% से भी ज्यादा है, पर अधिकांश हिन्दू चाहते ही नहीं की गौहत्या पर बैन लगे, अधिकांश हिन्दुओ को गौहत्या से कोई लेना देना ही नहीं, अगर लेना देना होता तो गौहत्या पर भारत में भी सम्पूर्ण बैन लग जाता 

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