NGO की मदद लेकर चीन ने भारत का कॉपर प्लांट बंद कराया था, भारत अब उसके कॉपर/Aluminium पर बैन लगाएगा

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भारत सरकार ने फैसला किया है कि वह कॉपर और एल्युमीनियम के आयात में चीन पर भारत की निर्भरता को समाप्त करेगी। रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि भारत सरकार कॉपर एवं एल्युमिनियम के घरेलू उत्पादकों की रक्षा के लिए चीन और अन्य एशियाई देशों से आने वाले शिपमेंट पर अंकुश लगाने हेतु नीतियों को विकसित करेगी। इसके लिए सरकार ने तांबे और एल्यूमीनियम के आयात की निगरानी करने की योजना बनाई है।

सरकार की नीति है कि इन दोनों धातुओं के आयात से संबंधित सभी आंकड़े जुटा लिए जाएं जिससे भविष्य में एक फुलप्रूफ प्लान तैयार किया जा सके। इसके लिए सभी भारतीय आयातकों को सरकारी अधिकारियों के पास अपने आयात से पूर्व रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा। उन्हें अपने आयात से संबंधित सभी जानकारी सरकार के साथ साझा करनी होगी। सरकार हर बार आयात के लिए अलग लाइसेंस मुहैया करवाएगी।

गौरतलब है कि भारत में इन दोनों धातुओं का मुख्य निर्यातक चीन है। चीन के अलावा जापान, मलेशिया, थाईलैंड, वियतनाम आदि देशों से इनका निर्यात होता है। सरकार की योजना है कि जब तक भारतीय घरेलू उत्पादन भारत की जरूरतों को पूरा करने योग्य नहीं हो जाता तब तक चीन से आयात पर निर्भरता खत्म करने के लिए, अन्य विकल्प तलाशे जाएं। इसी क्रम में सरकार कॉपर व एल्युमिनियम के आयात को चीन से विकेंद्रीकृत करना चाहती है। अर्थात जब तक भारतीय उत्पादन नहीं बढ़ता तब तक इन दोनों धातुओं का आयात चीन के अतिरिक्त अन्य देशों से किया जाता रहेगा।

भारत ने वर्ष 2019-20 के दौरान के 4.4 बिलियन डॉलर के मूल्य का एल्युमीनियम आयात किया था। इसमें सबसे अधिक मात्रा में 1 बिलियन डॉलर के मूल्य का एल्युमिनियम चीन से आयात किया गया था। ऐसे में सरकार की योजना कोल, टेलीकॉम, इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के बाद धातुओं के मामले में चीन की आर्थिक घेराबंदी की है।

वहीं, कॉपर की बात करें तो वित्त वर्ष 2017-18 तक भारत कॉपर कैथोड का शुद्ध निर्यातक हुआ करता था, लेकिन 2018 में भारत के सबसे बड़े कॉपर प्लांट, स्टरलाइट कॉपर प्लांट के बंद होने से स्थिति बदल गई  कुछ मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो स्टरलाइट प्लांट बन्द होने के पीछे चीन का हाथ रहा है।

वर्ष 2018 में तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्थित इस प्लांट के विरुद्ध बड़ा जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ था। यह विरोध प्रदर्शन इतना हिंसक हो गया था कि पुलिस फायरिंग में 13 लोगों की जान गई थी। उस वक्त प्रदर्शन में लोकल चर्च तथा नक्सलीयों की मिलीभगत की बात सामने आई थी। हालांकि, प्रदर्शन के चलते तमिलनाडु सरकार ने दबाव में आकर प्लांट बंद करने का आदेश दे दिया था। बाद में मामला मद्रास हाई कोर्ट भी गया था। तब स्टरलाइट कॉपर की मालिकाना कंपनी, वेदांत समूह ने मद्रास उच्च न्यायालय को बताया था कि स्टरलाइट के खिलाफ चले इस प्रदर्शन को चीनी कंपनियों द्वारा वित्त पोषित किया गया था जो संयंत्र के बंद होने से लाभान्वित हो रहे हैं। हालांकि, वेदांता समूह यह केस हार गया था। वेदांता ने मद्रास हाईकोर्ट में इस प्लांट को दोबारा खोलने के लिए पुनर्विचार याचिका दायर की थी। परंतु अब कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के इसे बंद करने के फैसले को सही बताते हुए इस याचिका को खारिज कर दिया है।

हालांकि, वेदांता ने हार नहीं मानी है और मद्रास हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है।

बता दें कि इस कॉपर प्लांट के बंद होने के कारण भारत18 वर्षो के बाद रिफाइंड कॉपर के आयातक देशों में शामिल हो गया। केयर रेटिंग के मुताबिक तमिलनाडु के तूतीकोरिन में स्थित वेदांता के स्टरलाइट कॉपर प्लांट के बंद होने के चलते भारत को इसके आयात की जरूरत पड़ी है। रेटिंग एजेंसी केयर ने कहा कि वित्त वर्ष 2017-18 तक भारत कॉपर कैथोड का शुद्ध निर्यातक हुआ करता था, लेकिन स्टरलाइट प्लांट के बंद होने से स्थिति बदल गई है। भारत के कुल कॉपर निर्यात में स्टरलाइट कॉपर यूनिट कंपनी की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत हुआ करती थी, लेकिन इसके बंद होने के बाद अब भारत को कॉपर जापान, कांगो, सिंगापुर, चिली, तंजानिया, यूएई और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से आयात करना पड़ रहा है। परंतु अब भारत ने चीन से आयात पर ही प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।

स्पषट है भारत के धातु उद्योग को कमजोर करने के लिए चीन ने बहुत प्रयास किया लेकिन इतने के बाद भी चीन अपनी योजनाओं में सफल नहीं हो पाएगा। कुछ महीनों पहले ही हमने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि सरकार उन सभी क्षेत्रों की पहचान कर रही है जहां पर भारत पूर्णतः चीन के आयात पर निर्भर है।

सरकार की योजना ऐसे क्षेत्रों में अपने आयात को विकेन्द्रीकृत करके चीन पर निर्भरता खत्म करने और साथ ही धीरे-धीरे भारत को इनमें आत्मनिर्भर बनाने की है। सरकार द्वारा कॉपर और एल्युमिनियम के क्षेत्र में यह योजना लागू की जा रही है जो भारतीय उत्पादकों के लिए अच्छी खबर है।

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