चीन से कई गुना छोटा यह देश जिनपिंग को खून के आंसू रुला रहा है, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया उसके साथ है

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चीन के विरुद्ध वैश्विक स्तर पर मोर्चा खुल चुका है। शुरुआत अमेरिका ने की और अब जापान, ऑस्ट्रेलिया, भारत, यूके सहित कई देश चीन के विरुद्ध आ चुके हैं। लेकिन एक ऐसा भी देश है पापुआ न्यू गिनी, जो शुरुआत में तो चीन के विरुद्ध नहीं था, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के निरंतर प्रयास और चीन की सच्चाई सामने आते ही इस देश ने भी चीन के खिलाफ आक्रामक तेवर दिखाने शुरू कर दिये।

द डिप्लोमैट की रिपोर्ट के अनुसार, पापुआ न्यू गिनी ने चीन से आने वाले खनन कर्मचारियों से भरी प्लेन को पापुआ में आने से रोक दिया। दरअसल चीनी कंपनी ने सूचित किया था कि, चीन से आने वाले इन कर्मचारियों को COVID 19 से लड़ने वाली वैक्सीन दी गई थी। इतने सारे लोगों को कोविड का ऐसा टीका दिया गया जिसके असर की प्रामाणिकता के कोई सबूत नहीं हैं। यह खबर जब पापुआ के एजेंसियों को पता चली तो उन्होंने इसके संभावित खतरे को देखते हुए तत्काल प्रभाव से चीन से आने वाले उस विमान की लैंडिंग पर रोक लगा दी।

पापुआ न्यू गिनी के COVID Response कंट्रोलर डेविड मैनिंग ने इस विषय पर प्रकाश डालते हुए बताया, ये निर्णय हमारे नागरिकों के हित में था। ऐसा न करने पर हमारी जनता को कैसी-कैसी मुसीबतों का सामना करना पड़ेता, इसका हम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते”

पर बात यहीं पर खत्म नहीं होती। डेविड मैनिंग ने आगे बताया कि वो टीकाकरण के मुद्दे पर चीन की जवाबदेही चाहते हैं। उनके अनुसार, देश के स्वास्थ्य विभाग ने इस समय कोई मेडिकल ट्रायल स्वीकृत नहीं कराया है।  ही हमारे पास चीन द्वारा विकसित वैक्सीन के उपयोग को लेकर कोई भी याचिका आई है। ऐसे में हम चाहते हैं कि, चीन इस बात पर अपना स्पष्टीकरण दे।”

चीन पापुआ न्यू गिनी में भी इनफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में सहायता के नाम पर उसे अपने कर्ज़ के जाल में फंसा रहा है और उनसे अपना काम भी निकलवा रहा है। यह ठीक वैसे ही है जैसे चीन ने अफ्रीका में नाइजीरिया के साथ और एशिया में नेपाल, मालदीव और श्रीलंका के साथ किया। लेकिन इन देशों से उलट पापुआ न्यू गिनी जल्द ही चीन की चालें भाँप गया और इसमें उसकी सहायता किसी और ने नहीं बल्कि ऑस्ट्रेलिया ने की।

द डिप्लोमैट के अनुसार ऑस्ट्रेलिया को भनक लगी कि, चीन ने कोरोना वायरस से लड़ने के लिए जो कथित वैक्सीन निर्मित की है, उसका उपयोग वह पापुआ में स्थित अपने संयंत्रों में काम करने वाले चीनी एवं स्थानीय कर्मचारियों पर कर सकता है। ऑस्ट्रेलिया ने इस बारे में पापुआ न्यू गिनी के प्रशासन को तत्काल प्रभाव से सूचित किया।

हालाँकि, यही एक कारण नहीं है जिसके लिए ऑस्ट्रेलिया पापुआ न्यू गिनी में चीन की बढ़ती गतिविधियों से चिंतित  था। दरअसल, पापुआ न्यू गिनी में चीन के टेक कंपनी Huawei का डेटा केंद्र भी स्थित है, जिसपर आरोप है कि, वह चीन के लिए हिन्द प्रशांत क्षेत्र में जासूसी करता है। इसके अलावा इस केंद्र पर पापुआ सरकार की जासूसी करने के भी आरोप लगे है, जिसे ऑस्ट्रेलिया के न्यूज़ पोर्टल फाइनेंशियल रिव्यू ने अपने विशेष रिपोर्ट में कवर भी किया था।

ऐसे में अब पापुआ की सरकार वो गलतियाँ नहीं करना चाहती, जिसके कारण श्रीलंका और नाइजीरिया जैसे देशों को चीन के कर्जजाल का दुष्परिणाम भुगतना पड़ा। ऑस्ट्रेलिया के सहयोग से पापुआ न्यू गिनी अब न केवल चीन के कुटिल नीतियों के प्रति सतर्क है, बल्कि अब चीन से जवाबदेही भी चाहता है।

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