आनंद महिंद्रा Vs चीनी ऑटोमोबाइल: अफ्रीकी और दक्षिण अमेरिका में महिंद्रा ने चीन को जब पीछे छोड़ दिया था

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इस आधुनिक युग में केवल सरकारें ही प्रतिस्पर्धा नहीं करती, अपितु हर क्षेत्र के उद्योगपति भी प्रतिस्पर्धा करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में चीनी कंपनियों ने दुनिया भर में अपनी धाक जमा रखी है, और भारत अब धीरे-धीरे उसे हर क्षेत्र में चुनौती दे रहा है। लेकिन एक ऐसा क्षेत्र है, जहां भारत ने भी अपनी धाक जमाई है, और चीन से उस क्षेत्र में कई कदम आगे भी हैं। ये क्षेत्र है Latin America और अफ्रीका के आटोमोबाइल मार्केट, जहां भारत चीन से कई कदम आगे चल रहा है।

उदाहरण के लिए ट्रैक्टर का क्षेत्र ही देख लीजिये। जैसे-जैसे Latin America के देश और अफ्रीका के देश mechanised एग्रिकल्चर यानि आधुनिक कृषि की ओर बढ़ रहे हैं, ट्रैक्टर की मांग भी बढ़ी है। चीन और भारत दोनों ही इस क्षेत्र में अफ्रीका में प्रतिस्पर्धा में रहे हैं, लेकिन यहाँ भारत का पलड़ा अधिक भारी है, जिसे स्वयं चीन के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स ने भी स्वीकार किया है।

ऐसे में इस क्षेत्र के असली विजेता बनकर निकले हैं आनंद महिंद्रा। आनंद महिंद्रा तो प्रारम्भ से ही राष्ट्रवादी थे, परंतु वुहान वायरस, और अभी हाल ही में चीन द्वारा गलवान घाटी में हुए हमले के बाद से उन्होंने अपनी ओर से भारत को एक वैश्विक पहचान दिलाने के लिए कमर कस ली है। हालांकि, इस बार की चुनौती में भी वो विजय बनकर उभरेंगे इसमें किसी को कोई शक नहीं चाहिए ,क्योंकि वो ऐसा एक बार पहले भी कर चुके हैं। जब उन्होंने अफ्रीकी और Latin America के आटोमोबाइल मार्केट को अपनी कर्मभूमि के तौर पर चुना था और चीन के दबदवे को न केवल कम किया था बल्कि लोगों का दिल जीतने में भी कामयाब रहे थे।

आनंद महिंद्रा काफी पहले ही Latin America में काफी निवेश कर चुके हैं। वर्ष 2018 से ब्राजील में महिंद्रा एंड महिंद्रा ने एक स्थानीय कंपनी के साथ जाइंट वेंचर खोलने का निर्णय लिया था। इस निर्णय के अंतर्गत महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी Latin America के चार प्रमुख देश – ब्राज़ील, अर्जेंटीना, मेक्सिको और चिली में अपने उत्पाद भी बेचेंगे और उसका प्रचार प्रसार भी कर रहे हैं। चीनी ट्रैक्टर के महिंद्रा ट्रैक्टरों से कोई मुकाबला ही नहीं हैं, जो चीनी ट्रेक्टर के मुकाबले न केवल मजबूत हैं बल्कि किफायती भी हैं।

आज भी महिंद्रा विश्व के सबसे बेहतरीन और मजबूत ट्रैक्टर बनाने के लिए काफी विख्यात है। नॉर्थ अमेरिका के मुख्य मार्केटिंग ऑफिसर एवं उपाध्यक्ष क्लियो फ़्रेंकलिन के अनुसार, “विरोधी आपकी स्कीम और ऑफर कॉपी कर सकते हैं, पर जिस तरह महिंद्रा ट्रैक्टर बनाता है, उस तरह ट्रैक्टर बनाना इतना भी सरल नहीं है, और ये हमारे साथ स्पर्धा में लगे हमारे विरोधी शायद ही कर पाएँ”।

पर बात यहीं पर खत्म नहीं होती। आनंद महिंद्रा की महिंद्रा कंपनी सिर्फ Latin America में ही नहीं, बल्कि अफ्रीका के आटोमोबाइल मार्किट में भी अपना वर्चस्व जमा चुकी है। अफ्रीका के समीकरण और वहाँ की सड़कों के अनुसार महिंद्रा के कई वाहन बेहद अनुकूल भी हैं, और इससे महिंद्रा को अच्छा खासा राजस्व भी मिलता है। इसके अलावा महिंद्रा जैसी अनेकों भारतीय उद्योगपति हैं, जो अफ्रीका और Latin America के आटोमोबाइल मार्किट में अपनी पैठ जमाना चाहते हैं, और यहाँ उन्हें चीन के मुक़ाबले काफी बढ़त भी मिली हुई है। परन्तु बात अपने व्यापार को ऊंचाइयों पर ले जाने तक ही सीमित नहीं हैं. वास्तव में वो कंपनी की प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के साथ साथ अपने कर्मचारियों का भी ख़ास ख्याल रखते हैं।

आनंद महिंद्रा की महिंद्रा कंपनी ने कई चुनौतियों के बावजूद Europe, Africa, and Latin America जैसे देशों में अपनी पकड़ मजबूत की। यहाँ के बाजार में चीन की पकड़ काफी मजबूत थी जिसे कमजोर कर महिंद्रा ग्रुप ने काफी लोकप्रियता हासिल की। महिंद्रा चीन के 25 अमेरिकी बिलियन डॉलर कृषि उपकरण बाजार में भी उतरना चाहते हैं और चीन को यहाँ भी मात देना चाहते हैं। पहली बार एक भारतीय विनिर्माण कंपनी ने चीनी निर्माण कंपनियों से आगे इस क्षेत्र में आगे जाएगी।

किसी भी आटोमोबाइल मार्केट का एक ही लक्ष्य होता है – विश्व भर में अपनी पैठ जमाना, परंतु अफ्रीका और Latin America के आटोमोबाइल मार्केट में अभी दुनिया की कोई महाशक्ति अपनी पैठ नहीं जमा पाई है।

ऐसे में दो ही ऐसे देश हैं, जिनके वर्तमान स्थिति और आटोमोबाइल मार्केट पर उनकी पकड़ को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि वे कोई कमाल कर सकते हैं। एक है भारत, तो दूसरा है चीन। लेकिन इस मोर्चे पर भारत का पलड़ा न केवल भारी है, बल्कि आनंद महिंद्रा की एंट्री से भारत चीन को अफ्रीका और Latin America के आटोमोबाइल मार्केट में वर्चस्व के मामले में मीलों पीछे छोड़ चुका है।

सच कहें तो भारत अफ्रीका और Latin America के आटोमोबाइल, विशेषकर ट्रैक्टर मार्केट में इसीलिए सफल है, क्योंकि उन्होंने न केवल ग्राहकों की नब्ज़ जल्दी पकड़ी, बल्कि चीन की तुलना में उच्च गुणवत्ता वाले  किफ़ायती उत्पाद भी प्रदान किए।

अब जब हाल ही में चीन ने भारत पर कटाक्ष किया कि ‘भारत के पास राष्ट्रवाद के अलावा है ही क्या’, तो भारत पर इस तरह के कटाक्ष के बाद आनंद महिंद्रा मैदान में उतरे और उन्होंने ट्वीट किया “मैं समझता हूँ कि यह ट्वीट भारत के लिए सबसे प्रभावी प्रेरणा और हुंकार की तरह काम कर सकता है। हमें प्रेरित करने के लिए धन्यवाद! हम ज़रूर उठेंगे”।

यही नहीं अब एक अहम कदम उठाते हुए महिंद्रा ग्रुप की आईटी कंपनी टेक महिंद्रा ने बीएसएनएल के 4जी सेवा को अपग्रेड करने की नई बोली में भाग लेने का निर्णय लिया है। मतलब अब इस क्षेत्र में भी आनंद महिंद्रा बड़ा बदलाव लाने वाले हैं और चीन को बताएंगे राष्ट्रवाद के साथ क्या कर सकता है।

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