अंबानी टेलीकॉम सेक्टर में आये और ये सेक्टर हमेशा के लिए बदल गया, अब महिंद्रा भी आ रहे हैं

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पीएम नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत की हुंकार क्या भरी, मानो आधे से अधिक भारतीय अपना योगदान देने के लिए आगे आने को तैयार हो गए। गलवान घाटी में चीन द्वारा किए गए हमले के बाद से भारतीयों ने चीनियों का वर्चस्व हर क्षेत्र से खत्म करने के लिए कमर कस ली है, और इसी दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए महिंद्रा ग्रुप की आईटी कंपनी टेक महिंद्रा ने बीएसएनएल के 4जी सेवा को अपग्रेड करने की नई बोली में भाग लेने का निर्णय लिया है।

इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत के दौरान टेक महिंद्रा के सीईओ सीपी गुरनानी ने बताया कि कैसे टेक महिंद्रा बीएसएनएल के 4जी सेवा को अपग्रेड करने में सहायता कर सकती है। उनके अनुसार“4जी हो या 5जी, हम भारत के ‘डिजिटल हाइवे’ की रचना में मदद करेंगे। हम इस प्रकार की टेक्नोलॉजी के संचार में कुशल है और आशा करते हैं कि यह सुअवसर हमारी कंपनी को ही मिले”। परंतु सीपी गुरनानी वहीं नहीं रुके। उन्होंने आगे ये भी बताया, “ऐसा नहीं है कि भारतीय कंपनियों के पास क्षमता या प्रतिभा नहीं है। परंतु हमने अपनी क्षमताओं को एक बड़े मंच पर कभी परखा ही नहीं। आशा करते हैं कि इस मंच [4जी अपग्रेडेशन] के माध्यम से हमारी क्षमताओं के बारे में संसार को पता चल सके”।

बता दें कि अभी हाल ही में बीएसएनएल ने 4 जी सेवाओं को अपग्रेड करने का टेंडर को रद्द किया था, क्योंकि इसके लिए Huawei और ZTE जैसी चीनी कंपनियाों ने भी दावेदारी ठोकी थी। 9000 करोड़ रुपये मूल्य के इस टेंडर को पुनः नीलामी के प्रक्रिया से गुजरना होगा, जिसके लिए टेक महिंद्रा अपनी सेवाएँ देने के लिए हिस्सा लेने को तैयार है। इसी के साथ टेक महिंद्रा महिंद्रा ग्रुप के संस्थापक आनंद महिंद्रा के आदर्शों पर सफलतापूर्वक चलता हुआ दिखाई दे रहा है।

अभी हाल ही में जब ग्लोबल टाइम्स के मुख्य संपादक हू शीजिन ने भारत पर तंज़ कसते हुए कहा कि इस देश के पास राष्ट्रवाद के अलावा और है ही क्या, तो आनंद महिंद्रा ने तुरंत पलटकर जवाब देते हुए ट्वीट किया, “मैं समझता हूँ कि यह ट्वीट भारत के लिए सबसे प्रभावी प्रेरणा और हुंकार की तरह काम कर सकता है। हमें प्रेरित करने के लिए धन्यवाद! हम ज़रूर उठेंगे”।

लगता है आनंद महिंद्रा इस परिप्रेक्ष्य में सही दिशा में अपने कदम बढ़ा रहे हैं, और मुकेश अंबानी की सफलता से बढ़िया प्रेरणा उनके लिए कोई हो ही नहीं सकती। जब मुकेश अंबानी ने जियो सेवा की घोषणा की थी, तब कई लोगों ने उपहास उड़ाते हुए पूछा कि क्या ये योजना कभी सफल भी होगी? परंतु लॉन्च होने के पूरे 4 वर्ष बाद आज जियो विश्व के सबसे तेज़ी से उभरती टेलिकॉम कंपनियों में से एक है।

इतना ही नहीं, जियो उन चंद कंपनियों में शामिल है, जिन्होंने 5जी सेवा के विकास के लिए किसी चीनी उपकरण का सहारा नहीं लिया। जियो ने पिछले कुछ समय में अपने ही दम पर इस तकनीक को विकसित करने में कड़ी मेहनत की है। जियो सक्रिय रूप से कार्बनिक और अकार्बनिक अप्रोच के मिश्रण के माध्यम से 5जी और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) प्रौद्योगिकी कैपेसिटी का निर्माण कर रही है।

यह कदम न केवल भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर भी पहला है, क्योंकि अधिकांश ऑपरेटर नेटवर्क उपकरणों के लिए टेक्नोलॉजी वेंडर पर निर्भर हैं। जियो के अधिकारियों के मुताबिक,“जियो ने 5जी तकनीक संबंधित सब कुछ एंड-टू-एंड डेवलप किया है। बाकी वेंडर की तुलना में जियो अधिक स्केलेबल और पूरी तरह से स्वचालित हैं क्योंकि जियो के पास अपना स्वयं का क्लाउड-नैटिव प्लेटफॉर्म है”। इतना ही नहीं, JIO के स्वामी और प्रख्यात उद्योगपति मुकेश अंबानी ने 25 फरवरी को अमेरिका के टेलीकम्युनिकेशन के सूरमाओं के साथ हुई एक मेगा कॉन्फ्रेंस में ये खुलेआम घोषणा की थी, “हमारी कंपनी दुनिया में पहली ऐसी कंपनी होगी, जिसके 5 जी तकनीक का एक भी उपकरण चीनी मूल का नहीं है”।

जब मुकेश अंबानी का जियो टेलिकॉम सर्विस भारतीय टेलिकॉम की शक्ल सूरत बदल सकता है, तो कल्पना कीजिये, महिंद्रा ग्रुप का प्रवेश क्या कर सकता है। हम आशा करते हैं कि टेक महिंद्रा अपने उद्देश्य में पूर्ण रूप से सफल हो और भारतीय टेलिकॉम सेवा को नई ऊंचाइयों पर ले जाये।

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